Sambhal & Mumbai के कारोबारी की बरेली की मीट फैक्टरी पर GST का छापा, देर रात तक जारी…


लव इंडिया, बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित रहबर फूड्स मीट फैक्टरी पर एक बार फिर जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को जोन के चार जिलों से आई जीएसटी की टीम ने पुलिस बल के साथ फैक्टरी परिसर में छापा मारकर गहन जांच शुरू की, जो देर रात तक जारी रही।

27 अधिकारियों की टीम ने घंटों की जांच


जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब तीन बजे जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा के करीब 27 अधिकारी और लगभग 20 पुलिसकर्मी कैंट थाना क्षेत्र में स्थित फैक्टरी पहुंचे। टीम के पहुंचते ही फैक्टरी का मुख्य गेट बंद करा दिया गया और सुरक्षा कारणों से कर्मचारियों के मोबाइल फोन बंद कराए गए, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो सके।


पूरे परिसर पर लिया गया नियंत्रण


छापेमारी के दौरान जांच टीम ने फैक्टरी परिसर को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। चारों ओर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। पुलिस बल को फैक्टरी के बाहर और अंदर प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया।


लेखा विभाग से जब्त किए गए दस्तावेज


सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले जीएसटी टीम ने फैक्टरी के लेखा विभाग में जांच शुरू की। यहां से लेन-देन, खरीद-फरोख्त, टैक्स भुगतान और बिलिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए हैं। इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित कर चोरी या अनियमितता का पता लगाया जा सके।


मालिकाना हक को लेकर जांच


बताया जा रहा है कि रहबर फूड्स फैक्टरी का संबंध मुंबई के कारोबारी फिरोज शेख से है, जबकि संभल के इमरान को इसमें पार्टनर बताया जा रहा है। जीएसटी टीम फैक्टरी के स्वामित्व, पार्टनरशिप स्ट्रक्चर और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।


पहले भी हो चुकी है कार्रवाई


स्थानीय सूत्रों का कहना है कि रहबर फूड्स फैक्टरी पर इससे पहले भी विभागीय कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में इस बार की छापेमारी को पिछले मामलों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। जांच का दायरा केवल बरेली तक सीमित न रहकर अन्य राज्यों से जुड़े कारोबार तक बढ़ सकता है।


आधिकारिक बयान का इंतजार


फिलहाल जीएसटी विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने और दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ही कर चोरी या अन्य अनियमितताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जरूरत पड़ने पर आगे और भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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