नवजात शिशु की मृत्यु के लिए डॉ.स्मिता बंसल दोषी, 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक महिला की नवजात पुत्री की मृत्यु के मामले में डॉक्टर स्मिता बंसल को उपभोक्ता आयोग ने 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयुष कुमार वार्ष्णेय ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनकी पत्नी दीप्ति वार्ष्णेय का इलाज डॉक्टर स्मिता बंसल के पास था, और आठवें महीने में उनके ऑपरेशन के दौरान नवजात पुत्री की मृत्यु हो गई थी।

आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि डॉक्टर स्मिता बंसल और मदर चाइल्ड एंड हेल्थ केयर सेंटर को आयुष कुमार वार्ष्णेय को 5 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा, साथ ही 50 हजार रुपये मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि के लिए और 5 हजार रुपये वाद व्यय के लिए भी देना होगा।

संभल। बहजोई निवासी आयुष वार्ष्णेय की पत्नी प्रथम बार मां बनने वाली थी जिसके लिए उन्होंने चंदौसी स्थित डॉक्टर स्मिता बंसल को दिखाकर मंथली चेकअप कराए आठवे माह में उनके प्रवस पीड़ा हुई तो उनका अल्ट्रासाउंड किया गया तो बच्चे की स्थिति नॉर्मल थी डॉक्टर द्वारा उनका ऑपरेशन किया गया जिन्होंने एक पुत्री को जन्म दिया और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई इस संबंध में आयुष कुमार वार्ष्णेय ने अपनी शिकायत डॉक्टर स्मिता बंसल से दर्ज की।

कहा कि मंथली चेकअप किए जाने के बावजूद तथा आपके द्वारा कराए गए अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी बच्चे की धड़कन नॉर्मल थी तो बच्चे की मृत्यु कैसे हो गई जिस पर डाक्टर द्वारा उनकी कोई बात नहीं सुनी तो उन्होंने इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सकारी जनपद संभल से की जहां उन्होंने जांच की और जांच में डॉक्टर के द्वारा किए गए ऑपरेशन पर अपना संदेह व्यक्त किया तथा यह भी कहा कि बच्चे की मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी न करना भी अस्पताल ब डॉक्टर की कमी है।

उक्त बातों को लेकर आयुष्मान मदर चाइल्ड केयर हॉस्पिटल चंदौसी के डॉक्टर स्मिता बंसल से बात की तो उन्होंने उसकी किसी भी बात सुनने से इनकार कर दिया इसी बात को लेकर वो उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय से संपर्क किया और आप बीती बताई।

उनकी ओर से लव मोहन वार्ष्णेय एडवोकेट द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग संभल में परिवाद प्रस्तुत किया गया जहां आयोग ने दोनों पक्षों को तलब कर अपना-अपना पक्ष रखने की बात कही तो वहां डॉक्टर की ओर से बताया गया कि उन्होंने प्रैक्टिशनर पॉलिसी ले रखी है जिस कारण इंश्योरेंस कंपनी को भी पार्टी बनाया जाए आयोग के आदेश पर इंश्योरेंस कंपनी को भी तलब किया गया।

आयोग ने सभी पक्षों को सुना और सुनकर अपना निर्णय आयुष कुमार वार्ष्णेय के पक्ष में देते हुए कहा की मदर चाइल्ड और हेल्थ केयर सेंटर व उसके डॉक्टर स्मिता बंसल को आवेशित किया जाता है कि आयुष कुमार की पत्नी दीप्ति वार्ष्णेय के आपरेशन व नवजात शिशु पुत्री के इलाज में किए गए व्यावसायिक कदाचार हेतु मुबलिग 5 लाख रुपए वह उसे पर परिवाद संस्थान की तिथि से 7% वार्षिक ब्याज सहित अंदर 2 माह में अदा करें।

इसके अलावा विपक्षीगण परिवादी को पचास हजार रुपए ₹50000 मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि की मद में तथा ₹5000 पांच हजार रुपए वाद व्यय के मद में भी अदा करेंगे नियत अवधि में धनराशि अदा न किए जाने पर ब्याज की दर 9 प्रतिशत वार्षिक दे होगी।

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