स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम का 101वां भंडारा

लव इंडिया, मुरादाबाद। माघ अमावस्या अत्यंत पुण्य दायी है,माघ माह की अमावस्या के अवसर पर गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों में वर्णित विशेष कथाओं के आधार पर विद्वानों का मत है कि माघ मास की अमावस्या जहां एक ओर पूजा, दान और स्नान करने वाले भक्त के और साधक के पुण्य को प्रबल करती है, वहीं दूसरी ओर जाने-अनजाने किए गए पाप कर्म को भी क्षीण करती है। पाप का भी शमन करती है।


माघ अमावस्या के दिन की गई पितृ पूजा विशेष महत्व रखती है. पूरे वर्ष स्नान करने वाले साधकों को अमावस्या पर गंगा में स्नान अवश्य करना चाहिए,माघ अमावस्या के दिन पितृ पूजा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिस व्यक्ति के पितृ, जिस परिवार के पितृ संतुष्ट होते हैं उस व्यक्ति के और परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में सभी संकट कटते हैं, जीवन सुचारु होता है और व्यक्ति उन्नति की ओर अग्रसर होता है।


दान के दृष्टिकोण से अन्नदान को सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है, माघ अमावस्या के अवसर पर किए गए भंडारों के माध्यम से जिन भक्तों को, साधकों को अन्न की प्राप्ति होती है, जिनकी क्षुधा शांत होती है, उनके माध्यम से दान करने वाले व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम के अध्यक्ष बाबा संजीव आकांक्षी ने कहा कि निरंतर चलते हुए आज 101वें भंडारे का आयोजन संपन्न हुआ है.

आयोजन में प्रमुख रूप से डॉक्टर बृजपाल सिंह यादव, पंकज शर्मा, सुरेंद्र सिंह, संजय स्वामी, राजेंद्र मोहन, अनिमेष शर्मा, विमलेंद्र शर्मा, मयंक शर्मा, केशव देवी, सुनील कुमार शर्मा, प्रेमनाथ यादव, महेश शर्मा, प्रमोद रस्तोगी, निधि रानी शर्मा, अवधेश पाठक, धवल दीक्षित, गोपाल हरि गुप्ता, राघव शर्मा आदि उपस्थित रहे. कार्यक्रम के उपरांत 151 किलो भोग का प्रसाद वितरण किया गया।

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