गांव के पेयजल की चिंता में अपराधी बनाया जा रहा?
जनपद अमरोहा के डिडौली थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव सिनेमा जलालाबाद का मामला
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद के गांव सिनौरा जलालाबाद में पेयजल संकट को लेकर उठी आवाज अब प्रशासनिक कार्रवाई की बजाय आपराधिक मुकदमों तक पहुंच गई है। गांव निवासी मोहम्मद तौसीफ ने जब पानी की टंकी बनने के बावजूद सप्लाई न होने की शिकायत आईजीआरएस (एकीकृत जन शिकायत निवारण प्रणाली) पर दर्ज कराई, तो उनका उद्देश्य केवल इतना था कि गांव के लोगों को नियमित पानी मिल सके। लेकिन शिकायत का निस्तारण होने के बजाय शिकायतकर्ता और उसके परिवार को ही आरोपी बना दिया गया।
गांव में पेयजल संकट की जमीनी हकीकत
- सरकारी योजना के तहत गांव में पानी की टंकी का निर्माण हुआ।
- टंकी के संचालन के लिए सोलर पैनल और मोटर लगाए गए।
- इसके बावजूद गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
- ग्रामीणों को हैंडपंप, निजी बोरिंग या दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
आईजीआरएस शिकायत – एक-एक बिंदु
मोहम्मद तौसीफ द्वारा आईजीआरएस पर की गई शिकायत में मुख्य रूप से निम्न बिंदु उठाए गए:
- पानी की टंकी बनने के बाद भी गांव में सप्लाई शुरू नहीं होना।
- सोलर पैनल और मोटर होते हुए भी संचालन न किया जाना।
- ग्राम पंचायत स्तर पर समस्या बताने के बाद भी समाधान न मिलना।
- संबंधित विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर समस्या का निस्तारण कराने की मांग।

जल निगम ग्रामीण का जवाब और सियासत
- उत्तर प्रदेश जल निगम ग्रामीण ने आईजीआरएस पर जवाब दिया कि ग्राम प्रधान द्वारा सोलर पैनल उखाड़ लिया जाए।
- इसी जवाब के बाद गांव की राजनीति गरमा गई।
- शिकायत को विकास से हटाकर व्यक्तिगत टकराव का रूप दे दिया गया।

पहला मुकदमा – 23 जनवरी 2026
- थाना: डिडौली, जनपद अमरोहा
- FIR संख्या: 0021
- समय: 13:03 बजे
- वादी/शिकायतकर्ता: वसीम अहमद (पति – ग्राम प्रधान शबनम), निवासी ग्राम सिनौरा जलालाबाद, डिडौली, अमरोहा

रिपोर्ट में दर्ज कहानी (नैरेटिव)
वादी के अनुसार मोहम्मद तौसीफ व उसके परिजन ग्राम पंचायत भवन, सोलर पैनल व पानी की टंकी से जुड़े सरकारी कार्यों में बाधा डाल रहे थे। जब वादी पक्ष ने आपत्ति की तो गाली-गलौज की गई, धमकी दी गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की मंशा जाहिर की गई।
नामजद आरोपी
- मोहम्मद तौसीफ
- उनके परिवार के सदस्य

कथित धाराएं (BNS 2023) व अर्थ
- धारा 191(2): गलत सूचना देकर लोक सेवक को गुमराह करना
- धारा 324(4): जानबूझकर नुकसान पहुंचाना / शरारत
- धारा 351(2): आपराधिक धमकी
जांच अधिकारी (IO)
- सुरेंद्र पाल सिंह, उप निरीक्षक / अवर निरीक्षक

दूसरा मुकदमा – 26 जनवरी 2026
- थाना: डिडौली, जनपद अमरोहा
- FIR संख्या: 0028
- समय: 14:25 बजे
- वादी/शिकायतकर्ता: वसीम अहमद पुत्र शाकिर, निवासी ग्राम सिनौरा जलालाबाद, डिडौली, अमरोहा

रिपोर्ट में दर्ज कहानी (नैरेटिव)
वादी के अनुसार मोहम्मद तौसीफ अपने साथियों के साथ कार से जा रहे वादी को रोककर गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई, लाठी-डंडों से मारपीट की गई तथा पत्थर फेंके गए। इस दौरान कार का शीशा टूट गया और वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।
नामजद आरोपी
- मोहम्मद तौसीफ
- अजीम
- जाकिर
- गुल मोहम्मद
- मुशर्रफ
- भूरा

कथित धाराएं (BNS 2023) व अर्थ
- धारा 191(2): गलत सूचना / झूठा आरोप
- धारा 126(2): रास्ता रोकना
- धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुंचाना
- धारा 352: हमला
- धारा 324(4): शरारत / नुकसान
- धारा 351(2): आपराधिक धमकी
जांच अधिकारी (IO)
- सुरेंद्र पाल सिंह, उप निरीक्षक / अवर निरीक्षक
- पहले मुकदमे की जांच चल ही रही थी कि 26 जनवरी को दूसरा मुकदमा दर्ज हो गया।
- रिपोर्ट के अनुसार आरोप है कि मोहम्मद तौसीफ अपने साथियों के साथ कार से जा रहे वादी को रोककर गाली-गलौज करने लगे।
- जान से मारने की धमकी देने, लाठी-डंडों से मारपीट करने और पत्थरबाजी करने का आरोप लगाया गया।
- इस घटना में कार का शीशा टूटने और वाहन क्षतिग्रस्त होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।
- नामजद आरोपी:
- मोहम्मद तौसीफ
- अजीम
- जाकिर
- गुल मोहम्मद
- मुशर्रफ
- भूरा
- कथित धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 126(2), 115(2), 352, 324(4), 351(2) आदि।
- पहले मुकदमे की जांच चल ही रही थी कि दूसरा मुकदमा दर्ज हो गया।
- आरोप: रास्ता रोकना, मारपीट, जान से मारने की धमकी, संपत्ति को नुकसान।
- नामजद आरोपी:
- मोहम्मद तौसीफ
- अजीम
- जाकिर
- गुल मोहम्मद
- मुशर्रफ
- भूरा
शिकायतकर्ता पक्ष का पक्ष
- मोहम्मद तौसीफ का कहना है कि उन्होंने केवल पानी की समस्या उठाई थी।
- उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं है।
- उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

क्या शिकायत करना अब जोखिम भरा हो गया?
- लगातार मुकदमों से आम लोग शिकायत करने से डरेंगे।
- इससे सरकारी योजनाओं की खामियां उजागर होना मुश्किल होगा।
प्रशासन से उठते सवाल
- क्या पानी की सप्लाई शुरू करने पर कोई ठोस कार्रवाई हुई?
- क्या जल निगम और पंचायत की भूमिका की जांच हुई?
- क्या मुकदमे दर्ज करना ही समाधान है?

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