बिजली विभाग: साहब मुट्ठी में और ‘चपरासी’ हो गया ‘राजकुमार’

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। ‘साहब’ आते रहे और जाते रहे। इस बीच लगभग 15 साल से अधिक के वक्त में ‘साहब’ का चपरासी… चपरासी से ‘राजकुमार’ हो गया। भले ही कुर्सी पर साहब बैठते हो और फाइल पर भी ‘दस्कत’ करते हो लेकिन ‘चपरासी’ से ‘राजकुमार’ हो गए ‘राजकुमार’ की ही यहां पर चलती है।

जी हां! हम बात कर रहे हैं बिजली विभाग के एक ऐसे ‘राजकुमार’ की जो पद के विपरीत ‘राजकुमार’ है अर्थात कोठी नंबर 5 की… सिविल लाइन क्षेत्र के 12 कॉलोनी स्थित कोठी नंबर 5 में बिजली विभाग की टेस्ट लैब है जहां पर मीटर की जांच होती है।

यूं तो यहां अधिशासी अभियंता नेहा चौधरी हैं और एई मीटर कृष्णजीत बालियान… मगर विभागीय कर्मचारियों की माने तो दोनों अधिकारियों की कलम भी ‘राजकुमार’ के बिना फाइल पर नहीं चलती। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार टेस्ट लैब के इस ‘राजकुमार’ में ऐसा क्या है जो औरों में नहीं है…!

…और इसकी तहकीकात के लिए प्रथम मीटर टेस्ट लैब के करीबी बहुत कुछ बताते हैं। कहते हैं कि ‘साहब’ की मेहरबानी के चलते ‘राजकुमार’ से कोई बिगड़ना नहीं चाहता और यही कारण है की ‘राजकुमार’ हर काम में टांग अड़ा देता है और यह टांग तभी हटती है जब मुंह मांगी मुराद पूरी हो जाती है।

इसी के चलते प्रथम मीटर टेस्ट लैब के अन्य सभी कर्मचारी भीगी बिल्ली बने रहते हैं और अपने काम कराने के लिए भी ‘राजकुमार’ का ही सहारा लेते हैं। लगभग 15 साल से अधिक समय से एक ही कार्यालय में कार्यरत ‘चपरासी बनाम राजकुमार’ के बारे में खास यह भी है कि टैंपर्ड मीटर के बारे-न्यारे में भी महारत हासिल है। इसलिए मोल-भाव और लेन-देन के लिए ऊपर से मौखिक मंजूरी भी है और जब किसी को इतना कुछ हासिल हो जाए तो समझ लीजिए की ऊपर वाला मेहरबान है तो फिर … पहलवान क्यों ना होगा…।

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति है अर्थात योगी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति कोई सहनशीलता नहीं रखती है। यह नीति सुनिश्चित करती है कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती से निपटाया जाए मगर यहां ऐसा नहीं है।

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