Arya Samaj : चिंतन, मनन और पश्चाताप करके मानसिक विकारों को आगे न आने दें

लव इंडिया, मुरादाबाद। आर्य समाज मंडी बांस का 146 वां वार्षिकोत्सव एवं ऋषि बोधोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। आर्य समाज, मंडी बांस का 146वें वार्षिकोत्सव एवं ऋषि बोधोत्सव कार्यक्रम के द्वितीय दिवस भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम तीन दिनों तक अर्थात 25, 26, 27 फरवरी को प्रातः काल और सायंकाल प्रतिदिन 6 सत्रों में आयोजित किया जाएगा।

इस शुभ अवसर पर महायज्ञ,भक्ति भजन एवं वेद प्रवचन से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। देश के आर्य जगत के उच्च कोटि के अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य योगेश भारद्वाज जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें प्रतिदिन संध्या, प्रार्थना, उपासना करनी चाहिए संध्या का मतलब होता है प्रातः और सायं जब दिन और रात मिलते हैं मनुष्य प्रातःकाल संध्या में बैठकर रात के समय में आए मानसिक दोष को दूर करें और सायंकाल संध्या में बैठकर दिन में आए मानसिक दोष को दूर करें अर्थात दोनों संध्या में बैठकर उससे पहले समय में आए मानसिक विकारों पर चिंतन, मनन और पश्चाताप करके उन्हें आगे ना आने देने का निश्चय करें।

साथ ही, हमें पंच महायज्ञ को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। इसमें १.ब्रह्म यज्ञ अर्थात संध्योपासना करना। देव यज्ञ अर्थात घर में प्रतिदिन यज्ञ हवन करके शुद्ध,पवित्र करना। मातृ पितृ यज्ञ अर्थात अपने जीवित माता-पिता और बुजुर्गो की भरपूर सेवा करना।बलीवैश्य यज्ञ अर्थात गौ सेवा,पशु पक्षियों की अपनी साम्यर्थ के अनुसार सेवा करना।अतिथि यज्ञ अर्थात जिसके आने की कोई तिथि न हो या अचानक आए हुए वैदिक विद्वान या वेदों के शास्त्रार्थ कार का आतिथ्य और सेवा करना।वेदों के स्वाध्याय से मनुष्य का जीवन सात्विक,परोपकारी,धर्म परायण और अनंत गुणों से विद्यमान हो जाता है।

कहा कि इसलिए हम सभी को वैदिक सिद्धांतों पर चलते हुए अपने इस अनमोल जीवन को जीना चाहिए।इसके बाद आर्य जगत के उच्च कोटि के वैदिक भजनोपदेशक सतीश सत्यम ने महर्षि देव दयानंद के जीवन के अनेकों परोपकारों को भजनों में पिरों कर सुनाया। ईश्वर भक्ति से परिपूर्ण सुंदर भजनों को सुनकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए। आपके गए भजन हैं–” ऋषिवर दयानंद यदि होते घर-घर होता वेद प्रचार,ग्राम ग्राम में गुरुकुल होते वेदों के अनुसार” और “हुआ ध्यान में ईश्वर के जो मगन, उसे कोई क्लेश लगा ना रहा,जब ज्ञान की गंगा में नहाया,तब मन में मेल जरा ना रहा।


कार्यक्रम का सुन्दर संचालन मंत्री और योग विशषज्ञ डा.मनोज आर्य ने किया। आपने बताया कि महर्षि देव दयानंद सच्चे देशभक्त,स्वदेश भक्त,धर्म धुरंधर,वेदों के ज्ञाता,महान समाज सुधारक,सत्यार्थ प्रकाश रूपी ब्रह्मास्त्र देने वाले महान सन्यासी थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सूर्य प्रकाश द्विवेदी ने की तथा विशिष्ट अतिथि लोकेश आर्य रहें। संस्था के प्रधान निर्मल आर्य ने सभी का स्वागत और आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में मुख्य रुप से निर्मल आर्य, डा.मनोज आर्य, नवनीत रस्तोगी, अजब सिंह, चंद्रकिरण आर्य, प्रीता आर्य, अखिलेश रस्तोगी, विनीत रस्तोगी, आर्य संदीप त्रिवेदी, राधा रानी, डा.राम मुनि, रमेश सिंह, पीयूष रस्तोगी, सुमन रस्तोगी, रश्मि रस्तोगी, रमा आर्य,रीतु रस्तोगी,राम अवतार, दिनेश रस्तौगी, ज्ञानचंद शर्मा,रविंद्र रस्तोगी, अंकित शुक्ला, राम सिंह निशंक, यशपाल आर्य, दीपक गुप्ता,आदर्श गुप्ता, रविंद्र रस्तोगी, कादंबरी रस्तोगी,डॉली खन्ना,रश्मि रस्तोगी, आयुषी रस्तोगी, सौरव रस्तोगी,कल्पना शंकर, राजीव वीरेंद्र आर्य, नलिनी आर्य, कुसुम आर्य,सुषमा रस्तौगी, संतोष गुप्ता, सूर्य प्रकाश द्विवेदी, पूनम रस्तोगी,मथुरा प्रसाद आर्य,गायत्री आर्य, विभु आर्य आदि मौजूद रहें।

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