Burnout खतरे की घंटीः Dr. Prerana

लव इंडिया, मुरादाबाद। टीएमयू हॉस्पिटल में मनोरोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रेरणा गुप्ता बोलीं, लंबे समय का तनाव बर्नआउट या बीमारियों का सबब बन जाता है। तनाव किसी भी डिमांड या खतरे के प्रति नेचुरल रिएक्शन है। थोड़ा तनाव भले ही प्रेरित करता हैं, लेकिन बढ़ता तनाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।मनोरोग एक्सपर्ट डॉ. गुप्ता ने बताया, स्ट्रेस तीन प्रकार का होता है- एक्यूट स्ट्रेस, एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस, क्रोनिक स्ट्रेस। एक्यूट स्ट्रेस किसी विशेष घटना, एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस अस्त-व्यस्त या असंतुलित जीवन शैली और एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस वित्तीय समस्याओं या टॉक्सिक रिलेशनंस के कारण होता है।

डॉ. गुप्ता तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ओर से तनाव का अनुकूलन और उसका प्रबंधन पर आयोजित गेस्ट लेक्चर में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहीं थी। इससे पूर्व डॉ. प्रेरणा गुप्ता ने बतौर मुख्य वक्ता, नर्सिंग की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी, प्राचार्या प्रो. एम. जेसलीन आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके गेस्ट लेक्चर का शुभारम्भ किया। डॉ. सुमन वशिष्ठ ने स्वागत भाषण दिया।

डॉ. प्रेरणा गुप्ता ने तनाव अनुकूलन प्रकिया को जनरल अडैप्टेशन सिंड्रोम मॉडल के जरिए समझाते हुए चेतावनी, प्रतिरोध और थकावट चरणों की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने तनाव प्रबंधन के लिए प्रॉब्लम फोक्सड कोपिंग, इमोशन फोक्सड कोपिंग और अवोइडेंस तकनीक के संग-संग नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, माइंडफुलनेस अभ्यास, पेशेवर मदद आदि को की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. गुप्ता बोलीं, तनाव को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं हैं, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित और अनुकूलित किया जा सकता है।

नर्सिंग की डीन प्रो. एसपी सुभाषिनी ने कहा, स्टुडेंट्स खुद पर विश्वास रखें। लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहें। शांत और साहसी कदमों के संग आगे बढ़ते रहें। प्राचार्या प्रो. एम. जेसलीन ने आंतरिक तनावों को पहचानने और मानसिक रूप से सशक्त बनने पर जोर दिया। श्रीमती एकजोत कौर ने वोट ऑफ थैंक्स दिया। गेस्ट लेक्चर में जीएनएम और बीएससी नर्सिंग के 200 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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